ब्रेकिंग न्यूज़: तलवार दंपत्ति के बरी होने के बाद पकड़ में आया आरुषि का हत्यारा- हत्यारा कोई और नहीं खुद देखिये !

नई दिल्‍ली : नोएडा के बहुचर्चित आरुषि और हेमराज हत्याकांड में सजायाफ्ता आरुषि के माता-पिता डॉ. राजेश और नुपुर तलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरी कर दिया है. गाजियाबाद स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने 26 नवंबर, 2013 को राजेश और नुपुर को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. इससे एक दिन पूर्व इनको दोषी ठहराया गया था. राजेश और नुपुर फिलहाल गाजियाबाद की डासना जेल में सजा काट रहे हैं. उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी. इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस न्यायमूर्ति बीके नारायण और न्यायमूर्ति एके मिश्रा की खंडपीठ ने तलवार दंपति की अपील पर सात सितंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और फैसला सुनाने की तारीख 12 अक्तूबर को तय की थी.

New Delhi: Due to Noida’s well-known Aarushi and Hemraj massacre, the parents of Rajesh and Nupur Talwar have been acquitted by the Allahabad High Court, parents of Aarushi. Ghaziabad-based special CBI court had sentenced Rajesh and Nupur to life imprisonment on November 26, 2013. One day before this, he was convicted. Rajesh and Nupur are currently hanging in Ghaziabad’s Dasna jail. Uttar Pradesh’s then Chief Minister Mayawati handed over the probe to the CBI. The Allahabad High Court’s Bench Judge BK Narayan and Justice AK Mishra had reserved their verdict on September 7 on the appeal of the Talwar couple and the date for the verdict was fixed on October 12

आइये जानते हैं इस बहुचर्चित हत्‍याकांड और जुड़ी अदालती कार्यवाही का ब्योरा…

Let us know the details of this massacre and related court proceedings …

16 मई 2008 : 14 वर्षीय आरुषि तलवार नोएडा के जलवायु विहार स्थित अपने घर के बेडरूम में मृत मिली. उसका गला कटा हुआ था. हत्‍या का शक घरेलू नौकर हेमराज पर आया.

17 मई 2008 : हेमराज का शव तलवार दंपति के घर की छत पर मिला.

23 मई 2008 : आरुषि के पिता डॉ. राजेश तलवार को उत्‍तर प्रदेश पुलिस ने आरुषि और हेमराज की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया.

1 जून 2008 : मामले की जांच सीबीआई ने अपने हाथ में ले ली.

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13 जून 2008 : जांच के दौरान डॉ. राजेश तलवार के कम्पाउंडर कृष्णा को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया. तलवार दंपति की दोस्त अनीता दुर्रानी के नौकर राजकुमार और तलवार के पड़ोसी के नौकर विजय मंडल को भी बाद में गिरफ्तार कर लिया गया. तीनों को दोहरे हत्याकांड के आरोपी बने.

12 जुलाई 2008 : राजेश तलवार को गाजियाबाद की डासना जेल से जमानत पर रिहा किया गया.

12 सितंबर 2008 : कृष्णा, राजकुमार और विजय मंडल को निचली अदालत से जमानत मिल गई. सीबीआई मामले में 90 दिन तक आरोप पत्र दाखिल नहीं कर पाई.

10 सितंबर 2009 : आरुषि हत्याकांड की जांच के लिए केंद्रीय अन्‍वेषण ब्‍यूरो (सीबीआई) द्वारा दूसरी टीम बनाई गई.

29 दिसंबर 2010 : सीबीआई ने मामले में आरुषि हत्याकांड में अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दायर की.

25 जनवरी 2011 : सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ राजेश तलवार ने निचली अदालत में प्रोटेस्ट पिटीशन दायर की.

9 फरवरी 2011 : निचली अदालत ने सीबीआई द्वारा दाखिल क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया. इसके साथ ही कोर्ट ने आरुषि के माता-पिता राजेश और नुपुर तलवार को हत्या और साक्ष्‍य मिटाने का दोषी माना.

21 फरवरी 2011 : डॉ. राजेश और नुपुर तलवार ने ट्रायल कोर्ट के समन को रद्द करवाने के लिए हाइकोर्ट का रुख किया.

18 मार्च 2011 : हाईकोर्ट ने समन रद्द करने की तलवार के अनुरोध को खारिज कर दिया और उन पर कार्यवाही शुरू करने को कहा.

19 मार्च 2011 : तलवार दंपति ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जिसने उनके खिलाफ ट्राइल को स्टे कर दिया गया.

6 जनवरी 2012 : सुप्रीम कोर्ट ने तलवार की अर्ज़ी खारिज की और ट्रायल शुरू करने की इजाजत दी.

11 जून 2012 : गाजियाबाद में विशेष सीबीआई जज एसलाल के सामने ट्रायल शुरू हुआ.

10 अक्टूबर 2013 : मामले में अंतिम जिरह शुरू हुई, जिसके बाद 25 नवंबर को गाजियाबाद की विशेष सीबीआई अदालत ने तलवार दंपति को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई.

जनवरी 2014 : राजेश और नूपुर तलवार ने निचली अदालत के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी.

11 जनवरी 2017 : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की अपील पर अपना फैसला सुरक्षित किया.

1 अगस्त 2017 : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि तलवार की अपील दुबारा सुनेंगे, क्योंकि सीबीआई के दावों में विरोधाभास हैं.

8 सितंबर 2017 : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरुषि हत्याकांड मामले में फैसला सुरक्षित किया.

May 16, 2008: 14-year-old Arushi Talwar is dead in the bedroom of her home located in Noida’s climate vihar. His throat was chopped. The suspect’s murder came on domestic help Hemraj.

May 17, 2008: Hemraj’s body found on the roof of Talwar couple’s house.

May 23, 2008: Aarushi’s father, Dr. Rajesh Talwar, was arrested by the Uttar Pradesh Police on charges of killing Aarushi and Hemraj.

1 June 2008: The CBI has taken over the investigation into the matter.

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13 June 2008: During the investigation, the CBI has arrested the founder of Rajesh Talwar’s compound Krishna. Vijay Mandal, a servant of Talwar couple’s friend Anita Durrani, and Rajkumar, a servant of Talwar’s neighbor, was later arrested. The three were accused of double murder.

July 12, 2008: Rajesh Talwar was released on bail from Dasna jail in Ghaziabad.

September 12, 2008: Krishna, Rajkumar and Vijay Mandal get bail from the lower court. CBI could not file chargesheet in the case for 90 days.

September 10, 2009: Second Team was formed by the Central Bureau of Investigation (CBI) to probe the Aarushi murder case.

December 29, 2010: CBI files closure report in court in case of Aarushi murder case

25 January 2011: Rajesh Talwar filed a protest petition in the lower court against the CBI closure report.

9 February 2011: The lower court rejected the closure report filed by CBI. Along with this, the court convicted Aarushi’s parents Rajesh and Nupur Talwar for murder and eviction of evidence.

21 February 2011: Dr. Rajesh and Nupur Talwar moved the High Court to cancel the trial court summons.

March 18, 2011: The High Court dismisses the request for the cancellation of the cantonment and asked them to start the proceedings.

March 19, 2011: The Talwar couple turned to the Supreme Court, who had stayed the Trial against them.

January 6, 2012: The Supreme Court dismisses the order of the sword and allows the trial to begin.

June 11, 2012: The trial begins in special court in Ghaziabad.

October 10, 2013: Final prosecution started in the case, after which on November 25, Ghaziabad special CBI court sentenced the Talwars to life imprisonment while convicting them.

January 2014: Rajesh and Nupur Talwar challenged the lower court verdict in the Allahabad High Court.

11 January 2017: Allahabad High Court secures its decision on appeal of petitioners

1 August 2017: Allahabad High Court said that Swarar’s appeal will be heard again, as there are contradictions in CBI’s claims.

September 8, 2017: Allahabad High Court reserves the judgment on Aarushi murder case.

हाईकोर्ट ने इस बात पर आशंका जताई है कि आरुषि की हत्या में किसी बाहरी व्यक्ति का हाथ हो सकता है. हालांकि CBI इससे पहले इस बात पर ही ज़ोर देती रही कि फ्लैट में किसी बाहरी व्यक्ति की Entry नहीं हुई है.

The High Court has feared that any outsider can be killed in the killing of Aarushi. However, the CBI had earlier insisted that no outsider has been admitted in the flat.

शक कितना ही गहरा क्यों न हो, सबूत की जगह नहीं ले सकता. आरुषि हत्याकांड पर आए इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को अगर आपको एक लाइन में समझना हो, तो इससे बेहतर कोई विचार नहीं हो सकता है. क्योंकि इसी विचार को आधार बनाकर अदालत ने अपना फैसला सुनाया. और आरुषि के माता-पिता.. डॉक्टर राजेश और नूपुर तलवार को बरी कर दिया गया. वैसे तो इस केस से जुड़ी हुई बहुत सी बातें कल हमने आपको बताई थीं. लेकिन आज हमारे पास इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले की Copy मौजूद है. ये फैसला 273 पन्नों का है और आज दिन भर हमने इस फैसले को पढ़ा है.

How deep is the doubt, can not replace the evidence. If you have to understand the Allahabad High Court’s decision on the Aarushi massacre in a line, then there can be no better idea than this. Because the basis of this idea was based on the court’s verdict. And Aarushi’s parents .. Dr. Rajesh and Nupur Talwar were acquitted. By the way, we told you many things we had told you about this case yesterday. But today we have a copy of Allahabad High Court’s decision. This verdict is of 273 pages and today we have read this decision throughout the day.

ये केस बहुत उलझा हुआ है. हत्या के 9 वर्षों के बाद भी आरुषि और हेमराज का असली कातिल पकड़ा नहीं गया. हाईकोर्ट के फैसले से भले ही आरुषि के मां-बाप की रिहाई का रास्ता साफ हो गया हो, लेकिन आरुषि को न्याय मिलने की उम्मीद एक बार फिर अधूरी रह गई.

This case is very confused. Even after 9 years of murder, real killer of Aarushi and Hemraj was not caught. Although the High Court’s decision may have cleared the way for the release of Aarushi’s parents, the hope of getting justice for Aarushi was once again incomplete.

कल हमने आपको बताया था कि कैसे CBI ने इस केस को बंद करने की अपील करते हुए अदालत में Closure रिपोर्ट दाखिल की थी. ऐसा इसलिए हुआ था क्योंकि CBI के पास इस बात के पर्याप्त सबूत नहीं थे कि आरुषि की हत्या उसके माता-पिता ने ही की है. लेकिन इसके बावजूद निचली अदालत ने केस को बंद नहीं किया बल्कि आरुषि के माता-पिता के खिलाफ केस चलाने का आदेश दिया और फिर उन्हें दोषी करार दे दिया .

Yesterday we told you how the CBI filed a Closure Report in court, appealing to the closure of this case. This was because CBI did not have enough evidence to prove that Aarushi was murdered by her parents only. In spite of this, the lower court did not close the case but ordered the case against Aarushi’s parents and then convicted them.

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में इस बात पर गहरी चिंता जताई है और निचली अदालत के जज के खिलाफ बहुत गंभीर टिप्पणियां की हैं. ये टिप्पणियां क्या हैं, ये हम आपको विस्तार से बताएंगे. लेकिन सबसे पहले आपको ये बताते हैं कि अदालत ने अपने फैसले में और कौन सी महत्वपूर्ण बातें लिखी हैं?

The High Court has expressed deep concern in this matter and made very serious comments against the judge of the lower court. These are the comments, we will tell you in detail. But first of all tell you that what other important things have been written in the court’s decision?

हाईकोर्ट ने इस बात पर आशंका जताई है कि आरुषि की हत्या में किसी बाहरी व्यक्ति का हाथ हो सकता है. हालांकि CBI इससे पहले इस बात पर ही ज़ोर देती रही कि फ्लैट में किसी बाहरी व्यक्ति की Entry नहीं हुई है. हाईकोर्ट ने अपने फैसले में लिखा है कि ऐसे सबूत मौजूद हैं, जो फ्लैट में किसी बाहरी व्यक्ति की Entry की तरफ इशारा करते हैं. कोर्ट ने इसी Theory के आधार पर बात को आगे बढ़ाते हुए है ये भी लिखा कि CBI ने डॉक्टर राजेश तलवार के कंपाउंडर कृष्णा, और नौकर राजकुमार और विजय मंडल को गिरफ्तार किया था…. और उनसे पूछताछ भी की थी. ये तीनों बहुत लंबे समय तक इस हत्याकांड के संदिग्ध थे.

The High Court has feared that any outsider can be killed in the killing of Aarushi. However, the CBI had earlier insisted that no outsider has been admitted in the flat. The High Court has written in its verdict that there are evidence available which point to an outsider’s entry in the flat. The court is moving forward on the basis of this theory. He also wrote that the CBI had arrested Dr. Rajesh Talwar’s compounder Krishna, and the servant Rajkumar and Vijay Mandal … and also questioned him. These three were suspicious of this massacre for a very long time.

आरुषि और हेमराज की हत्या में राजेश और नूपुर तलवार को परिस्थिति से जुड़े सबूतों यानी Circumstantial evidence की वजह से उम्रकैद की सज़ा हुई थी. लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में साफ लिखा है कि परिस्थितियों की कड़ियों को आपस में जोड़ा नहीं गया और ये कड़ियां बीच में टूटी हुई हैं. जबकि ऐसे मामलों में Circumstantial evidence की कड़ियों को आपस में जोड़ा जाना चाहिए.

In the murder of Aarushi and Hemraj, Rajesh and Nupur Talwar were sentenced to life imprisonment due to evidence related to the situation i.e. Circumstantial evidence. But Allahabad High Court has clearly written in its verdict that the links of circumstances have not been linked and these bits are broken in the middle. In such cases, the links of Circumstantial evidence should be linked together

अदालत ने लिखा है कि Prosecution इस बात को साबित करने में नाकाम रहा कि फ्लैट अंदर से बंद था. और ये भी हो सकता है कि आरोपी डबल मर्डर करने के बाद फ्लैट के लोहे के दरवाज़े को बाहर से बंद करके भाग गए हों.

The court has written that Prosecution failed to prove that the flat was locked from inside. And it can also be that after the accused has double Murder, the iron door of the flat will be closed from outside.

अंत में अपने फैसले में अदालत ने लिखा है कि Prosecution आरोपियों के खिलाफ अपना केस साबित करने में पूरी तरह से नाकाम रहा. इसीलिए डॉक्टर राजेश तलवार और नूपुर तलवार को सभी आरोपों से बरी किया जाता है.

In the end, the court has written that Prosecution has failed to prove its case against the accused completely. That is why doctors Rajesh Talwar and Nupur Talwar are acquitted of all charges.

वैसे तो इलाहाबाद हाईकोर्ट की जिस बेंच ने ये फैसला सुनाया है, उसमें दो जज थे और दोनों ने संयुक्त रूप से ये फैसला सुनाया है. लेकिन फैसला सुनाने वाले हाईकोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार मिश्रा ने ट्रायल कोर्ट के जज के खिलाफ बहुत सी ऐसी बातें कहीं हैं, जिनका विश्लेषण किया जाना चाहिए.

However, the Bench of the Allahabad High Court, which has ruled in this verdict, had two judges in it and the two jointly announced this verdict. But Justice Arvind Kumar Mishra, the High Court judge who has given the verdict, has many such things against the trial court judge, which should be analyzed.

अदालत ने लिखा है कि इस मामले में ट्रायल जज श्यामलाल ने पूर्वाग्रह से ग्रस्त होकर फैसला सुनाया. ट्रायल जज ने इस बात का ध्यान नहीं रखा कि ये पूरा केस Circumstantial evidence पर आधारित था, इसलिए इसमें घटनाओं की कल्पना नहीं की जा सकती.

The court has written that in this case, trial judge Shyamlal has pronounced a judgment by having a prejudice. The trial judge did not care that the whole case was based on the Circumstantial evidence, so events can not be imagined in it.

ये टिप्पणियां बहुत महत्वपूर्ण हैं. आगे अपने फैसले में अदालत ने लिखा है कि ट्रायल कोर्ट के जज ने पूरे मामले को एक Mathematical Puzzle यानी गणित के एक सवाल की तरह हल किया. और हमेशा अपने पूर्वाग्रह को प्राथमिकता दी. लेकिन गणित में पूर्वाग्रह नहीं चलते.

These comments are very important. In the further decision, the court has written that the judge of the trial court solved the whole case as a mathematical puzzle question. And always preferred his bias. But there is no bias in mathematics.

अदालत ने लिखा है कि ट्रायल जज अपने फैसले में भटक गए थे. जज ने एक काल्पनिक स्थिति के ज़रिये, ये मान लिया कि उस दिन फ्लैट के अंदर और बाहर क्या हुआ था. जस्टिस मिश्रा ने ये भी लिखा कि ट्रायल कोर्ट के जज ने किसी Film Director की तरह तमाम तथ्यों को इधर-उधर से जोड़कर देखने की कोशिश की, लेकिन असलियत में क्या हुआ, ये बात कभी ठीक से सामने नहीं आ पाई.

The court has written that trial judges wandered in their decision. Judge, through a hypothetical situation, assumed what happened inside and outside the flat on that day. Justice Mishra also wrote that the judge of the trial court tried to connect all the facts like a film director, but it did not come out properly, what really happened in reality.

एक बार फिर से हम आपको बता दें कि हम आपको वो बातें बता रहे हैं, जो इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में निचली अदालत के जज के खिलाफ कही हैं. अदालत ने लिखा है कि ट्रायल जज इस बात को भूल गए कि उनके हाथ में कौन सा मामला है? इस मामले में असलियत में क्या हुआ था.. ये किसी को भी ठीक से नहीं पता और ये बात हमेशा अंदाज़ा लगाकर कही गई कि मौके पर क्या हुआ होगा? इस अंदाज़े के आधार पर ही परिस्थितियों का निर्माण किया गया और उसी पर फैसला सुना दिया गया.
अदालत ने कहा कि ऐसा माना जाता है कि ट्रायल जज.. पारदर्शी और बिना भेदभाव के फैसला करेंगे. उन्हें बुद्धिमान व्यक्ति माना जाता है और ये भी समझा जाता है कि वो अपनी कल्पनाओं को Infinity यानी अनन्तता तक नहीं फैलाएंगे. लेकिन इस मामले में कानून का मज़ाक बनाया गया.

Once again, let us tell you that we are telling you the things which the Allahabad High Court has said in its judgment against the lower court judge. The court has written that the trial judge forgot that what is the case in his hand? What happened in reality in this case .. It is not known to anyone properly and it was always done with an idea that what would have happened on the spot? Based on this estimation, the conditions were created and the verdict was given on the same basis.
The court said that it is believed that the trial judge will decide transparency and without discrimination. They are considered intelligent and it is also understood that they will not spread their fantasies to infinity, that is, infinity. But in this case the law was made fun of

हाईकोर्ट की ये टिप्पणियां बताती हैं कि गलती सिर्फ जांच एजेंसियों से ही नहीं बल्कि निचली अदालत से भी हुई है. वैसे गलतियों की शुरुआत उस दिन से ही हो गई थी, जब उत्तर प्रदेश पुलिस ने मामले की जांच की थी. उत्तर प्रदेश पुलिस ने घटना के एक हफ्ते के अंदर ही राजेश तलवार को मुख्य आरोपी बताया था और उन्हें गिरफ्तार कर लिया था. आज हमने अपनी Library से आपके लिए उस प्रेस कॉन्फ्रेंस के कुछ हिस्से निकाले हैं, जिसमें राजेश तलवार की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई थी. उस वक्त उत्तर प्रदेश पुलिस ने बड़े ही आत्मविश्वास के साथ इस पूरी घटना का पर्दाफाश किया था.

These comments of the High Court show that the mistake has not only happened with the investigating agencies but also the lower court. By the way, the mistakes were made from that day when Uttar Pradesh Police had investigated the matter. Within a week of the incident, Uttar Pradesh Police had told Rajesh Talwar as the main accused and arrested him. Today, we have removed some parts of the press conference for you from our Library, which provided information about Rajesh Talwar’s arrest. At that time, the Uttar Pradesh Police had exposed this whole incident with great confidence.

अब आपको डॉक्टर राजेश तलवार के कम्पाउंडर कृष्णा के नार्को टेस्ट और मेरठ रेंज के तत्कालीन IG गुरदर्शन सिंह द्वारा कही गई.. कुछ बातों पर ध्यान देना चाहिए गुरदर्शन सिंह ने मई 2008 में हुई Press Conference के दौरान, सीधे तौर पर डॉक्टर राजेश तलवार को हत्या का आरोपी बताया था.

Now you are told by Dr. Rajesh Talwar’s compoundor Narco test of Krishna and then IG Gurudaran Singh of Meerut range. Some things should be noted by Gurdarshan Singh during a press conference in May 2008, directly killing Dr. Rajesh Talwar Told the accused.

इसी Press Conference में गुरदर्शन सिंह ने ये भी कहा था, कि आरुषि की हत्या इसलिए हुई, क्योंकि उसके हेमराज के साथ ‘नज़दीकी संबंध’ थे. इसके बाद जब ये मामला बड़ा होने लगा तो जून 2008 में CBI को इस मामले की जांच सौंपी गई.

In this same press conference, Gurdarshan Singh had also said that the murder of Aarushi was done because he had ‘close relation’ with Hemraj. After this matter began to grow bigger, in June 2008, the investigation of this case was handed to the CBI.

और तब CBI के तत्कालीन Joint Director अरुण कुमार की टीम ने डॉक्टर राजेश तलवार के कंपाउंडर कृष्णा का नार्को टेस्ट करवाया था, हालांकि, CBI किसी भी नौकर के खिलाफ कोई सबूत पेश नहीं कर पाई थी, जिसकी वजह से निचली अदालत की नज़रों में कृष्णा और दोनों नौकर.. शक के दायरे से बाहर हो गए थे.

And then the then Joint Director of CBI Arun Kumar’s team had done the Narco test of Dr. Rajesh Talwar’s compounder Krishna, however, the CBI could not produce any evidence against any servant, due to which the trial of Krishna and Both the servants were out of the scope of doubt ..

इसके अलावा कृष्णा ने नार्को टेस्ट के दौरान कुछ ऐसी बातें कही थीं…जो काफी हद तक तत्कालीन IG गुरदर्शन सिंह द्वारा कही गई बातों से मेल खाती थीं. उदाहरण के तौर पर कृष्णा ने नार्को टेस्ट में कहा था, कि हेमराज ने आरुषि के साथ कुछ गलत करने की कोशिश की होगी, जिसकी वजह से उसे मार दिया गया.

Apart from this, Krishna had said such things during the Narco Test … which was largely matched by what IG Gurudaran Singh had said. For example, Krishna had said in the narco test, that Hemraj had tried to do something wrong with Aarushi, due to which he was killed.

लेकिन ये तमाम बातें अब इतिहास बन चुकी हैं. क्योंकि उत्तर प्रदेश पुलिस और राजेश तलवार के कंपाउंडर कृष्णा द्वारा कही गई बातें अदालत में साबित नहीं हो पाईँ. और इसी वजह से राजेश और नूपुर तलवार को बरी किया गया है. हालांकि आज दोनों गाज़ियाबाद की डासना जेल से रिहा नहीं हो पाए, क्योंकि जेल में अदालत का आदेश नहीं पहुंच पाया था. इस बीच हमने कई ऐसे लोगों से बात की है, जिन्होंने इस केस को बहुत नज़दीक से देखा है.

But all these things have become history now. Because the things told by Krishna, the compounder of Uttar Pradesh Police and Rajesh Talwar, could not be proved in court. And this is why Rajesh and Nupur Talwar have been acquitted. Although both of today are not released from Dasna prison in Ghaziabad

आज दिन भर लोग हमसे ये पूछते रहे कि आखिर आरुषि का हत्यारा कौन है? और अगर उसके मां-बाप निर्दोष हैं.. तो फिर ये हत्या किसने की ? हमने आपसे ये कहा था कि हम इस सवाल का जवाब ढूंढने की कोशिश करेंगे.. और आज इस पूरे मामले का DNA टेस्ट करने के बाद यही नतीजा निकला…कि आरुषि का हत्यारा कोई और नहीं.. बल्कि हमारा सिस्टम और जांच एजेंसियां हैं !

All day long people asked us who is the killer of Aarushi? And if his parents are innocent … then who killed this? We had told you that we will try to find an answer to this question .. And today the result of DNA test of this whole issue came out … that Aarushi’s killer is no more .. but our system and investigation agencies are !

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